इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का बजट दोगुना, ₹40,000 करोड़ का प्रावधान: वित्त मंत्री
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि Electronic Components Manufacturing Scheme के तहत मिलने वाली सहायता राशि को दोगुना किया जाएगा। अब इस योजना के लिए कुल ₹40,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह कदम भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है।
क्या है Electronic Components Manufacturing Scheme?
यह योजना देश में इलेक्ट्रॉनिक सामानों के जरूरी कंपोनेंट्स जैसे सेमीकंडक्टर पार्ट्स, डिस्प्ले यूनिट, कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, कनेक्टर और अन्य हार्डवेयर हिस्सों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। अभी तक भारत इन कंपोनेंट्स के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर रहा है।
बजट में क्या बड़ा बदलाव किया गया?
अब तक इस योजना के लिए सरकार द्वारा कम बजट आवंटित किया गया था, लेकिन बढ़ती जरूरत और ग्लोबल सप्लाई चेन को देखते हुए सरकार ने इसका आउटले बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा कंपनियों को इंसेंटिव मिलेगा और ज्यादा निवेश आकर्षित किया जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का साफ लक्ष्य है कि भारत सिर्फ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की असेंबलिंग तक सीमित न रहे, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में मैन्युफैक्चरिंग हब बने। इससे:
- आयात पर निर्भरता कम होगी
- घरेलू उत्पादन बढ़ेगा
- एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा
- लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे
उद्योग और निवेश पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से देशी और विदेशी कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की फैक्ट्री लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। खासतौर पर मोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को इससे फायदा होने की उम्मीद है।
मेक इन इंडिया को मिलेगी मजबूती
यह कदम Make in India और Atmanirbhar Bharat अभियान को और मजबूत करेगा। सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में भारत ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बने और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करे।
आगे क्या उम्मीद की जा रही है?
अब इस योजना के तहत नए दिशा-निर्देश और पात्रता शर्तें जारी की जाएंगी। इसके बाद कंपनियां आवेदन कर सकेंगी और उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकारी सहायता का लाभ उठा पाएंगी।
Electronic Components Manufacturing Scheme का बजट दोगुना करना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा और दूरगामी फैसला है। इससे न केवल उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
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FAQS
Q1. इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम क्या है?
उत्तर: यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे सेमीकंडक्टर पार्ट्स, PCB, सेंसर और अन्य हार्डवेयर के निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो।
Q2. सरकार ने इस स्कीम का बजट ₹40,000 करोड़ क्यों किया?
उत्तर: देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को तेज़ी से बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा बनाने के लिए सरकार ने इसका आउटले दोगुना किया है।
Q3. इस स्कीम से किन कंपनियों और उद्योगों को फायदा मिलेगा?
उत्तर: इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने वाली घरेलू कंपनियां, MSMEs, स्टार्टअप्स और विदेशी निवेशक इस स्कीम के तहत इंसेंटिव और सरकारी सहायता का लाभ ले सकेंगे।
Q4. क्या इस योजना से युवाओं को रोजगार मिलेगा?
उत्तर: हां, इस स्कीम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में हजारों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्निकल और स्किल्ड जॉब्स में।
Q5. इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट स्कीम से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: देश में इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन बढ़ने से मोबाइल, टीवी, लैपटॉप जैसे उत्पाद सस्ते हो सकते हैं और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
Q6. यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ से कैसे जुड़ी है?
उत्तर: यह स्कीम सीधे तौर पर ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करती है, क्योंकि इससे भारत में ही हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण संभव होगा।
